प्रेरक पथ ।

 गुरु दयाल ।     ११ भाद्र २०७६, बुधबार २२:००     229 जनाले पढ़िसके


शब्द रचना :- गुरु दयाल यदुवंशी । सिरहा । हाल-मलेसिया 

प्रेरक पथ खोजैत हम बिनु संदेह चलैत गेलौं,
विघ्न, बाधा जतेक एलैथ नि:संकोच कटैत गेलौं ॥
भुख-पियाससँ लड़ैत, घाम, रौदसँ जड़ैत बढ़ैत गेलौं,
दुख-धनियाक बेगरता मे टूटलो सिढ़ी चढ़ैत गेलौं॥
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गामसँ शहर तक भटकैत, अंततः मार्गदर्शनक खगता रहल,
एक-एक स्वप्नके टुँड़ियबैत विदेश तक चलि एलौँ॥
ओ बचपनक खेल-धुप माईँ-बाबूअक दुलार हेरा गेल,
आब तऽ जीनगीक सबटा पन्नामे स्वयं सून्य भगेलौँ॥
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ओ पुरान-धुरान सखा-संगीक किल्कारीसँ बंचित भेलौं,
नीजक अभिलाषा छोईड़क, बिच भँवर मे फँसि गेलौं ॥
गूरूअक परामर्श माथ धऽ लक्ष्यक ओर बढ़ैत रहलौँ,
दुखक पथार तड़हथ्थीसँ टारैत भाग्यक रेखा मिटाबैत रहलौँ॥
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संगतुरिया संगे ध्यानमग्न सँ सूनैत छलहूँ दिना-भद्रीक गाथा,
अखनो हम बाबा सलहेस, लोरीकक ईतिहाँस खोजैत रहि गेलौं॥
पथ हजार भेटल लोभ, अनियती के, सत्यक पथ तोपाएल छल,
मुदा गूरूजीक दर्शाओल सत्यक बाटपर डेग बढ़ाबैत गेलौं॥



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